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पाकिस्तान एयरलाइन्स का विमान दुर्घटनाग्रस्त | Plane Crash Karachi in Hindi | How ILS Works in Hindi

Plane Crash in Pakistan

INTRODUCTION

कुछ ही क्षणों पहले जब सभी पैसेंजर्स इस बात से खुश थे की प्लेन एयरपोर्ट पर लैंड कर गया है और वो सब अपनी मंजिल पर पहुँच गए है , तभी अचानक ऐसा क्या हुआ की प्लेन दोबारा से हवा में चला गया और जा कर एक रिहायसी मॉडल टाउन में घरो के ऊपर क्रैश कर गया।  ये दुखद हादसा क्यों हुआ और क्या इसे रोका जा सकता था? कुछ ऐसे सवाल जिनका जवाब जितना दुखद है शायद उतना ही जरूरी भी है

Case Study

आज की अपनी केस स्टडी शुरू करने से पहले हम आपको एयरप्लेन और उसकी लैंडिंग के बारे कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहेगे ताकि आप इस  दुखद हादसे से जुड़े सवालो और उसके कारणों को आसानी से समझ सके।

जिस तरह कार चलते वक़्त हमे एक निर्धारित स्पीड और रूट पर ही चलना होता है और ट्रैफिक rules को फॉलो करना पड़ता है , ठीक  उसी तरह एयरप्लेन को भी एक निर्धारित रूट हाइट और स्पीड को फॉलो करते हुए एक एयरपोर्ट से दूसरे एयरपोर्ट तक जाना होता है ताकि वो बिना आपस में एक दूसरे से टकराये सुरक्षित उड़ान भर सके।   

सबसे पहली चीज़ जो हम समझेगे वो है ग्लाइड स्लोप, जो किसी भी पायलट को ये बताता है की किसी एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड करने के लिए  एक प्लेन को किस हाइट और angle  से रनवे की तरफ बढ़ना है।  अगर और आसान भाषा में समझने की कोशिश करे तो ये आसमान में एक ऐसे रोड की तरह होता है जिस पर उड़ते हुए  ही कोई प्लेन एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कर सकता है अगर एयरप्लेन glide slope  से ऊपर या नीचे होगा  तो वो रनवे पर सुरक्षित लैंड नहीं कर पायेगा और पक्का क्रैश हो जायेगा।

अगर प्लेन ग्लाइड स्लोप से ऊपर होगा तो वो रनवे के काफी आगे जा कर लैंड करेगा जिस कारण वो रनवे के ख़त्म होने से पहले नहीं रुक पायेगा।  इसी तरह अगर प्लेन ग्लाइड स्लोप से नीचे होगा तो वो रनवे शुरू होने से पहले ही लैंड कर जायेगा और क्रैश हो जायेगा। 

आईये अब ILS सिस्टम को समझते है।  ILS यानि Instrument Landing System एक ऐसा ऑटोमेटेड सिस्टम है जिसका इस्तेमाल  करके पायलट प्लेन को automatically लैंड कर सकते है।

एयरपोर्ट के रनवे पर लगे हुए बहुत सारे सिग्नल पोल्स के माद्यम से प्लेन को रेडियो सिग्नल्स भेजे जाते है जो प्लेन की डायरेक्शन को कण्ट्रोल करके उसे सही ग्लाइड स्लोप में रनवे के पास ले कर आते है ताकि पायलट प्लेन को रनवे के बीचो बीच सही जगह पर लैंड कर सके।  ILS सिस्टम का इस्तेमाल करके ही पायलट बारिस , अँधेरे और घने कोहरे में भी प्लेन हो रनवे के बीचो बीच सही जगह पर लैंड करते है। 

उम्मीद है की अब आपको ग्लाइड स्लोप और ILS सिस्टम समज आ गया होगा और इस accident से जुडो हर पहलू और कारणों को आप भली भांति समज पाएंगे। तो आइये अब अपनी केस स्टडी शुरू करते है

22 मई 2020 , पाकिस्तान लाहौर का अलामा इक़बाल एयरपोर्ट।  पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन की फ्लाइट 8303 अपनी घरेलु उड़ान के लिए Jinnah International Airport कराची जाने की तयारी कर रही है।

एयरबस A 320 , 214 सीरीज का ये एक लगभग 15 साल पुराना प्लेन था एक Irish American company GE Capital Aviation Company से लीज पर लिया गया था। 2004 से 2014 तक ये प्लेन  China Eastern एयरलाइन के पास लीज पर था और इसके बाद 31 October 2014 को इसे पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन को लीज पर दिया गया।  मई 2019 में ही प्लेन में CFM 56 टाइप के दो नए इंजिन्स लगाए गए थे।  इस से पहले अक्टूबर 2014 में प्लेन के लैंडिंग गियर सिस्टम को भी बदला गया था। 

दुर्घटना से लगभग 2 महीने  पहले 21 मार्च 2020 को प्लेन का रूटीन मैंटेनस चेक किया गया था और रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लेन में किसी भी तरह की कोई सीरियस खराबी नहीं थी. दुनिया भर में चल रहे covid pandemic के कारण पिछले 2 -3 महीनो से इस प्लेन ने कोई उड़ान नहीं भरी थी और  7 May 2020 से ही इसने अपनी उड़ान दोबारा शुरू की थी और तब से अब तक ये  प्लेन 6 बार सकुशल अपनी निर्धारित उड़ाने पूरी कर चूका था ।  एयरबस के रिकार्ड्स के मुताबिक इस प्लेन ने अब तक कुल मिला कर 47124 घंटे की हवाई यात्रा पूरी की थी.

उस दिन इस फ्लाइट में 91 यात्रिओं के साथ साथ 8 crew members सवार थे।  फ्लाइट का नेतृत्व captain Sajjad Gul कर रहे थे और उनका  साथ  first officer Usman Azam दे रहे थे.

दोपहर के लगभग 1 बजे  फ्लाइट ने अपना rolloff process  शुरू  किया।  taxi way  से होते हुए प्लेन धीरे धीरे रनवे की तरफ बढ़ने लगा।  लगभग 1 बजकर 5 मिनट पर एयर कंट्रोलर टावर से परमिशन मिलने के बाद प्लेन ने लाहौर एयरपोर्ट से सकुशल अपना टेकऑफ पूरा किया। अपने निर्धारित फ्लाइट path को फॉलो करते हुए प्लेन सामान्य तरीके से उड़ान भर रहा था। 

लगभग 90 मिनट्स की सकुशल उड़ान के बाद प्लेन ने कराची एयरपोर्ट पर लैंडिंग की तैयारी शुरू की। उस दिन प्लेन को ILS landing का इस्तेमाल करते हुए रनवे 25L पर लैंड करना था और ILS signals को फॉलो करते हुए प्लेन धीरे धीरे रनवे की तरफ बढ़ने लगा।  उम्मीद है आपको याद होगा की अपने  वीडियो की शुरुआत में हमने आपको Glide स्लोप और ILS system से होने वाली automatic लैंडिंग के बारे में बताया था।

जब प्लेन एयरपोर्ट से लगभग 28 km दूर था तो ATC कंट्रोलर ने पायलट्स को सावधान करते हुए कहा की आप 10000 फ़ीट पर उड़ान भर रहे रहे है  जबकि लैंडिंग करने के लिए यहाँ आपको 7000 फ़ीट की उचाई पर होना चाहिए।  रिपोर्ट्स के मुताबिक पायलट्स ने ATC से कहा की वो अपनी हाइट से संतुस्ट है और वो प्लेन को सही सलामत लैंड करवा लेंगे।  और जब प्लेन एयरपोर्ट से महज 19 km दूर था तब ATC ने दूसरी बार पायलट्स को warn करते हुए कहा की लैंडिंग की इस position  पर aapko 3000 फ़ीट पर होना चाहिए जबकि आपका प्लेन 7000 फ़ीट की हाइट पर उड़ रहा है , रिपोर्ट्स के मुताबिक पायलट्स के फिर से ATC को कहा की प्लेन पूरी तरह से उनके कण्ट्रोल में है और वो उसे सकुशल लैंड करवा देंगे।

अब ILS signals को फॉलो करते हुए प्लेन अपने Glide Slope की तरफ बढ़ रहा था की तभी अचानक पायलट्स ने देखा की प्लेन के  लैंडिंग गियर्स को अभी तक डाउन नहीं किया गया है , जिसके तुरंत बाद पायलट ने लैंडिंग गियर नॉब को डाउन कर दिया।  लेकिन चूँकि उस वक़्त प्लेन की स्पीड उसकी निर्धारित लैंडिंग स्पीड से बहुत ज्यादा थी इसलिए प्लेन के लैंडिंग गियर नीचे नहीं आ पाएं। इस कारन से कॉकपिट में वार्निंग मैसेज आने लगता है की लैंडिंग गियर ढीक तरीके से काम नहीं कर रहे है।  कॉकपिट वौइस् रिकॉर्डर के अनुसार लैंडिंग गियर फेलियर वार्निंग मैसेज बार बार बज रहा था लेकिन न जाने क्यों पायलट्स इस पर ध्यान नहीं दे पाए। 

प्लेन की इतनी ज्यादा हाइट और तेज़ स्पीड को देखते हुए ATC कंट्रोलर ने पायलट को  टेकऑफ cancel करने का सुझाव देते हुए कहा की आप प्लेन को 180 left heading की तरफ मोड़ कर एयरपोर्ट का एक चक्कर लगा ले , लेकिन पायलट्स ने ATC कंट्रोलर से कहा की वो लैंडिंग जारी रखना चाहेंगे और प्लेन को सही सलामत लैंड करवा देंगे

लगभग 2 बजकर 32 मिनट्स पर पायलट्स ने ATC कंट्रोलर को संपर्क किया और बताया की वो ILS system को फॉलो करते हुए अपने प्लेन को 3500 से 3000 फ़ीट की उचाई पर ला रहे है ताकि प्लेन को रनवे 25L पर लैंड किया जा सके। अब प्लेन एयरपोर्ट से महज 5 km दूर रह गया था लिहाजा ATC ने पायलट्स को runway 25L पर लैंडिंग की अनुमति दे दी। कराची एयरपोर्ट के ILS system के मुताबिक एयरपोर्ट से 5 km की दूरी पर प्लेन की हाइट लगभग 1680 फ़ीट होनी चाहिए ताकि वो glide slope के अंदर रह कर लैंडिंग कर सके।  लेकिन उस वक़्त PIA फ्लाइट 4050 से 3725 फ़ीट के बीच उड़ रही थी।

कॉकपिट में अभी भी लगातार लैंडिंग गियर फेलियर के वार्निंग मैसेज बज रहे थे , लेकिन ना  जाने क्यों पायलट्स तब भी उन warning मैसेज पर ध्यान नहीं दे पाए और उन्होंने लैंडिंग को जारी रखा।  यहाँ ये बात भी गौर देने लायक है की पायलट्स ने अभी तक ATC को भी ये इन्फॉर्म नहीं किया था की प्लेन के लैंडिंग गियर्स में कोई खराबी है।  इसलिए हमारे लिए भी ये बताना काफी मुश्किल है की क्या पायलट्स को लैंडिंग गियर failure के बारे में पता भी  था या नहीं।

अब बहुत ही तेज़ स्पीड पर प्लेन रनवे की तरफ नीचे आने लगा रनवे के threshold point से 4500 फ़ीट दूर प्लेन के left engine ने रगड़ खाते हुए रनवे को टच किया।  इंजन की मेटल बॉडी के रनवे से टकराते ही बहुत ही तेज़ चिंगारी निकलने लगी।  रनवे पर रगड़ते हुए प्लेन threshold point से 5500 फ़ीट तक आ गया था और तभी प्लेन का राइट इंजन भी रनवे से टकरा गया।  चिंगारी उगलते हुए प्लेन रनवे पर पूरी रफ़्तार से दौड़ रहा था और अब रनवे भी लगभग ख़तम होने वाला था।

रनवे को खत्म होता देख पायलट्स लैंडिंग को कैंसिल करके प्लेन को दोबारा से टेकऑफ करने का फैसला करते है और  इंजिन्स की पूरी पावर के साथ  फिर से प्लेन को हवा में ले जाते है प्लेन को हवा में ले जाने के बाद पायलट्स फिर से एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को कांटेक्ट करते है और फिर से प्लेन को runway 25L पर लैंड कराने की अनुमति मांगते है।  कंट्रोलर पायलट्स को लैंडिंग की अनुमति देते हुए कहता है की आप प्लेन को 110 Left की डायरेक्शन में turn करके  3000 फ़ीट की उचाई पर ले जाइये।

लेकिन रनवे पर रगड़ खाने के कारण प्लेन  के दोनों इंजिन्स को काफी नुक्सान हो चूका था।  रगड़ के कारण इंजिन्स के hydraulic pipes टूट जाते है जिसके कारण बड़ी मात्रा में hydraulic fluid  और तेल leak होने लगता है लेकिन रनवे पर रगड़ खाने के कारण प्लेन प्लेन के दोनों इंजिन्स को काफी नुक्सान हो चूका था।  रगड़ के कारण इंजिन्स के hydraulic pipes टूट जाते है जिसके कारण बड़ी मात्रा में hydraulic fluid  और तेल leak होने लगता है  

और फिर देखते ही देखते प्लेन के दोनों इंजिन्स फ़ैल हो जाते और बिना इंजन पावर के प्लेन अब सिर्फ ग्लाइड करते हुए आगे बढ़  रहा था. अब बहुत तेज़ी से प्लेन की हाइट और स्पीड काम होने लगती है और पायलट्स के लिए प्लेन को कण्ट्रोल करना मुश्किल होता जा रहा था.

अब चुकी प्लेन की स्पीड काम हो चुकी थी,  जिसके कारण प्लेन के लैंडिंग गियर नीचे आ जाते है. प्लेन के लैंडिंग गियर नीचे आने के कारण प्लेन के स्पीड और भी तेज़ी से काम होने लगती है। प्लेन की हाइट को तेज़ी से कम होते देख ATC कंट्रोलर pilots को बार बार प्लेन की हाइट बढ़ाने के लिए कहता है।

लेकिन अब बहुत ढेर हो चुकी थी और पायलट्स पूरी तरह से प्लेन से अपना कण्ट्रोल खो  चुके थे. एक पर कटे हुए परिन्दे की तरह भारी भरकम हवाई जहाज एयरपोर्ट से सटे हुए मॉडल टाउन के भीड़ भाड़ वाले रिहायशी  इलाके में क्रैश हो जाता है। एक बड़े धमाके के साथ गिरते ही  प्लेन के टुकड़े टुकड़े हो कर उसमे आग लग जाती है.

 

भीड़ भाड़ वाला इलाका होने के कारण फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस को दुर्घटना स्थल तक पहुंचने में काफी मुश्किल आती है।  सिर्फ दो पैसेंजर्स को छोड़ कर प्लेन में सवार किसी भी यात्री या क्रू मेंबर्स को इस दर्दनाक हादसे से बचाया नहीं जा सका। 

हादसा इतना दर्दनाक था की पाकिस्तान के साथ साथ पूरी दुनिया में शोक की लहर फ़ैल गयी घटना के तुरंत बाद Pakistan’s Aircraft Accident Investigation Board और ‘ National Transportation Safety Board ने एक इन्वेस्टीगेशन टीम घठित करके इसकी जांच शुरू कर दी।

24  जून 2020 को इस दुर्घटना की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया की लैंडिंग करते वक़्त प्लेन की हाइट उसकी निर्धारित हाइट से बहुत ज्यादा थी जिसके कारण प्लेन को बहुत ही तेज़ गति से नीचे उतरा गया।  नीचे उतरते वक़्त प्लेन के लैंडिंग गियर नीचे नहीं आ  पाए जिसका वार्निंग मैसेज भी कॉकपिट में बार बार बज  रहा था।  किन्ही कारणों से पायलट लैंडिंग गियर फेलियर के मैसेज पर ध्यान नहीं दे पाए या उन्होंने इसे अनदेखा कर दिया और प्लेन रनवे से रगड़ खाता हुआ belly landing कर गया जिस कारण से उसके दोनों इंजन क्षतिग्रस्त हो गए और इंजन फेलियर के कारण प्लेन क्रैश कर गया 

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