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क्या पायलट ने क्रैश किया प्लेन ? Greatest Mystery Of Flight MH370

INTRODUCTION

एयरपोर्ट पर अपने परिवार वालो और दोस्तों की फ्लाइट के आने का इंतज़ार करते हुए लोगो के मन में कैसे कैसे ख्वाब और ख्याल आ रहे होते है की जब वो अपने चाहने वालो से मिलेंगे तो ऐसे गले लगेंगे , और ऐसे बातें करेंगे। 

उस वक़्त इंतज़ार का हर पल बड़ा ही भारी लगता है। अब अगर ये इंतज़ार कभी ख़तम ही ना हो , जिस फ्लाइट का इंतज़ार वो लोग एयरपोर्ट पर कर रहे है , वो कभी लैंड ही ना हो. उस वक़्त अगर लोगो से ये कहाँ जाएँ की वो फ्लाइट कही गायब हो गई है और उसका कोई अता पता नहीं है।

और इंतज़ार करते करते दिन, महीनो और साल निकल जाएँ , तो सोचिये अपने चाहने वालो का इंतज़ार कर रहे लोगो पर क्या बीतती होगी। 

हमारी आज की केस स्टडी एक ऐसी ही फ्लाइट के बारें में है जिसने टेकऑफ तो किया , लेकिन उसके बाद वो फ्लाइट कहाँ गायब हो गयी, किसी को पता नहीं।

CASE STUDY

8 March 2014 , malasia का Kuala Lampur International एयरपोर्ट।

मलेशिया एयरलाइन की फ्लाइट नंबर MH 370 Kuala Lampur से चाइना के Beijing जाने की तैयारी कर रहा था ।

9 M – MRO नाम से रजिस्टर्ड Boeing 777 सीरीज का ये विमान लगभग 11 साल 10 महीने पुराना था।

विमान का नेतृत्व 53 वर्षीय मलेशिया कप्तान Zahare A कर रहे थे

Captain Zahare A ने 1981 में एक cadet पायलट के तोर पर मलेशिया एयरलाइन को ज्वाइन किया था, और धीरे धीरे अपनी पायलट ट्रेनिंग को complete करने के बाद 1983 में उन्हें second officer promote किया गया

इसके बाद 1991 में उन्हें Beoing 737 के कप्तान के तोर पर प्रमोट किया गया और जिसके बाद 1996 में उन्हें एयरबस A 330 और बोइंग 777 का कप्तान नियुक्त किया गया

अब तक के अपने सफल कैरियर और लगभग 18365 घंटो के फ्लाइंग experience के कारण कप्तान Zahare A को एक अनुभवी फ्लाइंग instructor और मंझे हुए फ्लाइंग examiner के तोर पर भी जाना जाता था

co pilot के तोर पर 27 वर्षीय first officer Fariq A कप्तान का साथ दे रहे थे

first officer Fariq A ने भी 2007 में एक कैडेट पायलट के तोर पर मलेशिया एयरलाइन में अपने फ्लाइंग career की शुरुआत की थी

November 2013 में उन्होंने Boeing 777 के first officer के लिए अपनी ट्रेनिंग शुरू की थी

first officer trainee के तोर पर आज ये उनकी आखिरी फ्लाइट थी जिसके बाद उन्हें आधारिक तोर पर first officer नियुक्त किया जाना था

कुल मिला कर अपने अब तक के कैरियर में पायलट Fariq A ने लगभग 2763 घंटो का फ्लाइंग experience प्राप्त किया था

धीरे धीरे कर सभी पैसेंजर और क्रू मेंबर्स फ्लाइट में सवार होने लगे।  उस दिन फ्लाइट 370 में 227 पैसेंजर्स के साथ 12 क्रू मेंबर्स सवार थे

नार्मल तरीके से अपने सभी ग्राउंड tasks पूरे करने के बाद रात के लगभग 11 बजकर 48 मिनट पर प्लेन ने एयरपोर्ट पर अपना rolloff process शुरू किया।

धीरे धीरे टैक्सी way से होते हुए फ्लाइट रनवे 32 R पर पहुँचती है और ATC tower की permission के बाद रात के लगभग 12 बजकर 45 मिनट पर फ्लाइट MH 370 Kuala Lampur International एयरपोर्ट से टेकऑफ करती है

Airport  ATC टावर द्वारा दिए गए निर्देश को follow करते हुए फ्लाइट लगभग 18000 फ़ीट की उचाई तक पहुच जाती है जिसके बाद फ्लाइट को अपने अगले दिशा निर्देश के लिए Kuala Lampur ATC की रेडियो frequency से connect कर दिया जाता है 

रात के लगभग 12 बजकर 45 मिनट पर Kuala Lampur ATC फ्लाइट 370 को 35000 फ़ीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने का निर्देश देता है और जिसके बाद धीरे धीरे अपनी हाइट बढ़ाते हुए फ्लाइट 35000 फ़ीट की उचाई पर पहुँच जाती है

रात करीब 1 बजकर 20 मिनट पर फ्लाइट Kuala Lampur ATC राडार की रेंज से निकलकर Ho Chi Minh के राडार एरिया में दाखिल होती है

इसके  2 मिनट बाद,  gulf of Thailand में igari waypoint से गुजरते हुए फ्लाइट Kuala Lampur ATC के राडार पर दिखाई देती है लेकिन उसके 10 सेकण्ड्स बाद फ्लाइट 370 फिर से Kuala Lampur ATC की राडार स्क्रीन से गायब हो जाती है

राडार स्क्रीन से गायब होने के बाद ATC कंट्रोलर फ्लाइट 370 में लगे transponder की मदद से फ्लाइट को राडार स्क्रीन पर locate करने की कोशिश करता है लेकिन फ्लाइट के transponder सिस्टम से कोई signal recieve नहीं होता। यहां ये अंदेशा होता है की शायद इसके बाद फ्लाइट 370 के trasnsponder सिस्टम को बंद कर दिया गया था।

हलाकि इसके बाद फ्लाइट civilain राडार से गायब हो जाती है लेकिन पास का  एक military राडार अभी भी फ्लाइट 370 को track कर रहा था।  मिलिट्री राडार के डाटा के अनुसार फ्लाइट पहले right turn लेती है और उसके बाद left turn ले कर वापस south west direction में मुड़ जाती है

बिना ATC टावर की परमिशन के फ्लाइट 370 जब ऐसे अपना route बदलती है तो Vietnamese  ATC टावर को थोड़ा शक होता है और वो उसी airspace में उड़ रहे एक दूसरे जहाज के कप्तान को फ्लाइट 370 से contact करने के लिए कहते है।  कप्तान फ्लाइट 370 के रेडियो से connect करने में सफल तो हो जाता है लेकिन उसे सिर्फ अजीब तरह की खुसपुसाहट की आवाज़े सुनाई देती है

रात के 1 : 30 और 1 : 35 के बीच 33000 फ़ीट पर उड़ते  हुए फ्लाइट 370 अभी भी south west direction में Peninsula region के ऊपर से उड़ान भर रही थी।  इसी दौरान पास के ही ismail petra airport के राडार को 4 बार अपनी स्क्रीन पर कोई un-identified object दिखाई देता है, जो माना जा रहा है की फ्लाइट 370 ही होगी

इसके बाद लगभग 1 बजकर 52 मिनट पर फ्लाइट Penang island के दक्षिणी किनारे के ऊपर से गुजरती हुई रिकॉर्ड होती है।  यहाँ से ये फ्लाइट right turn ले कर malacca के Vampi और pulaw waypoint के ऊपर से गुजरती है और यही वो आखरी location है जहाँ रात के 2 बजकर 22 मिनट पर फ्लाइट 370 को लोकेट किया जाता है।  इसके बाद किसी भी राडार पर ये फ्लाइट दिखाई नहीं देती

सुबह के 5 बजकर 30 मिनट पर , फ्लाइट से आखरी बार contact होने के लगभग 4 घंटो बाद , Kuala Lampur Aeronautical Rescue Coordination center फ्लाइट 370 की खोजबीन शुरू करता है

अपने schedule के अनुसार इस फ्लाइट को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर Beijing पहुंचना था , लेकिन 7 बजकर 30 मिनट पर Malaysia एयरलाइन एक media report जारी करते हुए announce करती है की रात के 1 बजकर 22 मिनट से फ्लाइट 370 से कोई कांटेक्ट नहीं हो पा रहा है और सरकार ने खोज और बचाव कार्य शुरू कर दिया है

Gulf of thailand और south china sea के area में तुरंत की search और  resue ऑपरेशन शुरू कर दिया गया लेकिन 10 दिन गुजर जाने के बावजूद भी फ्लाइट MH 370 का कोई अता पता नहीं लगा

लेकिन इस हादसे के दस दिन बाद Britain स्तिथ INMARSAT  satelite कंपनी को ऐसी जानकारी मिली जिसने उनके साथ साथ पूरी दुनिया को चौका दिया।  उनके satellite database  रिकॉर्ड के अनुसार मिलिट्री राडार से गायब होने के बाद भी flight MH 370 लगभग 6 घंटो तक हिन्द महासागर के ऊपर उड़ान भरती रही

असल में फ्लाइट 370 के इंजन में लगे कुछ sensor लगातार Satellite को कुछ signal भेज रहे थे।  लेकिन इन सिग्नल्स से प्लेन की लोकेशन के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल रही थी। Satellite डाटा  के अनुसार प्लेन ने सुबह के 8 बजकर 10 मिनट पर satelite को आखिरी बार सिग्नल भेजे।

फ्लाइट MH 370 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर Bejing एयरपोर्ट पर लैंड करना था, लेकिन satellite signal के अनुसार ये फ्लाइट सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक उड़ान भर रही थी , जिसका मतलब है की यही वो वक़्त होगा जब फ्लाइट का फ्यूल खत्म हो गया होगा और वो क्रैश कर गई होगी

satellite और प्लेन के बीच में सिग्नल transmission के दौरान लगे time को calculate करके प्लेन की स्थिति का अनुमान लगाया गया।  इन calculations के तहत 7 बड़े बड़े एरिया सर्कुलर एरिया को निर्धारित किया गया जिसमे फ्लाइट MH 370 के होने का अनुमान लगाया गया।

आखिरी सर्कुलर एरिया के अनुसार ये प्लेन कज़ाकिस्तान से लेकर हिन्द महासागर के दक्षिणी छोर तक कही भी हो सकता है।  इतने बड़े एरिया में प्लेन को ढूढ़ना अपने आप में एक बहुत ही मुश्किल काम था।  मलेशिया के साथ कई और देशो ने इसमें  हिस्सा लिया और जिसके बाद शुरू हुआ इतिहास का सबसे मुश्किल और महंगा search ऑपरेशन।

18 मार्च से 22 अप्रैल के बीच 46 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा के एरिया में 19 समुंद्री जहाजों और 345 से ज्यादा हवाई उड़ानों ने फ्लाइट 370 को ढूंढ़ने की कोशिश की , लेकिन बदकिस्मती से ना ही तो उस प्लेन का कोई पता चला और ना ही किसी तरह का कोई मलवा मिला जिससे ये पक्का सबूत मिल सके की ये प्लेन crash हो चूका है

खोजबीन के आखिरी चरण में ऑस्ट्रेलिया के समुंद्री एरिया में लगभग 1800 वर्ग किलोमीटर के एरिया की सोनार जांच भी की गई ताकि समुन्दर की गहराईओं में भी इस प्लेन के किसी मलवे का पता लगाया जा सके , लेकिन वहां भी कोई सफलता नहीं मिली

और आख़िरकार इस घटना के 2 साल और 10 महीनो के बाद भी जब फ्लाइट 370 की कोई जानकारी नहीं मिली तो मजबूरन 17 January 2017 को इस search operation को बंद कर दिया गया

3 अक्टूबर 2017 को publish हुई ATSB की रिपोर्ट के अनुसार, समुंद्री एरिया में किये गए इस सर्च ऑपरेशन में लगभग 155 million US डॉलर का खर्चा आया।

इस रिपोर्ट के अनुसार satellite सिग्नल और अलग अलग राडार से मिले डाटा के अनुसार , इस सर्च ऑपरेशन के लिए 25000 वर्ग  किलोमीटर के एरिया को निर्धारित किया गया था

January 2018 में Ocean Infinity नाम की एक private एजेंसी ने इस   25000 वर्ग  किलोमीटर के एरिया में दोबारा जांच शुरू की. लेकिन May 2018 में 1 लाख बारह हज़ार वर्ग किलोमीटर के एरिया में सर्च करने के बावजूद भी उन्हें कुछ हाथ नहीं लगा. और इसके बाद 9 June 2018 को इस private search operation को भी बंद कर दिया गया

मीडिया में छपी कुछ खबरों के अनुसार, इस घटना में किसी भी तरह के मानवीय हाथ होने की स्थिति में मलेशियन पुलिस का सबसे पहला शक कप्तान Zaharie की तरफ था।  January 2016 में जांच के दौरान लीक हुए एक document के अनुसार FBI टीम को कप्तान Zaharie के घर से एक फ्लाइट simulator बरामद हुआ था जिसके database में उसी तरह का फ्लाइंग रूट  मिला था , जिस रूट पर प्लेन को आखिरी बार पाया गया था। 

हालाँकि ATSB ने कप्तान Zaharie पर शक को निराधार बताते हुए कहा की पायलट के घर पर्सनल फ्लाइट simulator में फ्लाइट मैप का पाया जाना सामान्य बात है और इसे शक की नज़र से नहीं देखना चाहिए

लेकिन इंटरनेशनल जांच comitte ने इस बात को कभी भी खारिज नहीं किया की हो सकता है की कप्तान Zaharie ने ही एक सोचे समझे प्लान के तहत जानबुज कर फ्लाइट 370 को क्रैश किया हो

हालांकि कुछ लोग तो ये भी दावा करते है की कप्तान Zaharie ने इस लिए प्लेन को बहुत ही सावधानी से समुन्दर में किसी ऐसी अनजान जजगह क्रैश किया की पूरा का पूरा प्लेन बिना टूटे  हुए समुन्दर में समां जाएँ ताकि कभी उसके टुकड़े भी ना मिल सके.

आख़िरकार July 2018 में मलेशिया की trasport ministry के द्वारा , फ्लाइट 370 के गायब होने की आधिकारिक रिपोर्ट जारी कर दी गई।  और जैसा की लग रहा था इस रिपोर्ट में भी प्लेन की गायब होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। 

अपनी रिपोर्ट में इन्वेस्टिगेटर ने यही कहाँ की प्लेन के ब्लैक बॉक्स या फ्लाइट data रिकॉर्डर के ना मिल पाने के कारण इस प्लेन के गायब होने की कोई भी वजह बता पाना ना मुमकिन है।

लेकिन प्लेन में सफर कर रहे यात्रिओं के परिवार वालो के लिए इस पर यकीन करना बहुत ही मुश्किल है की आज की  digita दुनिया में जहाँ पूरा संसार इंटरनेट और satellite कम्युनिकेशन से जुड़ा हुआ है वहां इतना बड़ा और आधुनिक प्लेन कैसे अपने आप आसमान में गायब हो सकता है।  और रह रह कर इस हादसे में किसी साजिश की ख़बरें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आती रहती है।  लेकिन पुख्ता तौर पर आज तक इस फ्लाइट के बारें में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।  कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभी तक अलग अलग आइलैंड पर प्लेन के 27 ऐसे टुकड़े मिले है जो शायद इसी प्लेन के है।  लेकिन इन ख़बरों में भी कितनी सचाई है ये कह पाना बहुत ही मुश्किल है

अगर अपना कोई दुनिया छोड़ कर चला जाएं तो उसे भगवान की मर्ज़ी समझ हर हम धीरे धीरे उस हादसे से उबर जातें है. लेकिन अगर यही पता ना हो की वो इंसान जिन्दा है भी या नहीं और पूरी उम्र यहीं लगता रहे की कभी भी उनकी कोई ख़बर आ सकती है तो इस असमंजस की भावना के साथ जिंदगी गुज़ारना कितना मुश्किल होता है इसका हम शायद अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते है।

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